डा.जीतेन्द्र उधमपुरी एक एहा नां जेने उधमपुर दा ही नि पूरे जम्मू सूबे दा ना पूरे देश च मशूर किता है। इन्दा जनम उधमपुर शैह्‌र च होया और केश मजबूरियें दी वजह कन्ने इन्हें गी बाद इच जम्मू शिफ्ट ओना पेया। इन्दा नां  डा.जीतेन्द्र गुप्ता हा पर उधमपुर शैह्‌र दे प्यार ने इन्हें गी अपना नां बदलने ऊपर मजबूर करी दिता। इन्दी माँ दा सुखना हा की एह डाक्टर या इंजीनियर बनने दी वजाए अपनी पढाई साहित्य च करन पर इन्दी  माँ अपना सुखना पूरा होंदा नी  दिखी  पाईयां और इन्दा इंतकाल बड़ी तौले ही ओई गया जेस वेल्ले डा.जीतेन्द्र उधमपुरी दी उम्र सिर्फ १५ साल ही। बड़ी मुसीबतां ते मुश्किलां चुकिये इन्हें हिंदी,उर्दू ते अंग्रेजी पाशाएं च ग्रेजुएशन पूरी किती ते फी  अपना पी.जी. कौर्स  वि इन्ही त्रे पाशा ते Mass Communication च पूरा किता। इन्हां  ही नि ऐदे बाद इन्हांने  Ph.D. डोगरी ड्रामा च पूरी किती। पर इन्हीं आर्थक लचारी दे वाद वी इन्हें अपनी हिम्मत नि शोड़ी और अपनी पढाई चालू रखी ते  कन्ने कन्ने निक्का मुट्टा काम वि करदे गये और आज एक एहा मक़ाम हासिल किता है जी सी दिखी ते सुनिए ही हर डोगरा गर्व महसूस करन लगदा है ।

इन्हें गी ४०-५० साल ओई गये हैं साहित्य च कम करदे होए। इन्हें गी १९८१ च साहित्य अकादमी अनाम थोया हिंदी साहित्य च दिते गये इनदे योगदान दे लेई। इन्हां ही नि इन्हें गी आज तक जम्मू कश्मीर अकादमी आफ आर्ट एंड कल्चर दी तरफां तू चार अनाम, राष्ट्रीय हिंदी सेवा सहस्रवादी अनाम,राष्ट्र कवि पंडित सोहन लाल अनाम, सुभद्रा कुमारी चौहान जन्म शताब्दी अनाम, राष्ट्र कवि पंडित सोहन लाल अनाम कुल मलाइये १५० दे करीब अनाम थोये दे हन।

सबतू वडा अनाम इन्हें गी केश दिन पहले ही राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल दी तरफां पद्मश्री द्वारा  दिता गया। एस अवार्ड दी के एहमियत है ओ हर भारतीय जान्दा  है,मेरे ख्याल कन्ने उसी इथे बतान दी कोई लोड़ नि होनी चाईदी।

डा. जीतेन्द्र उधमपुरी द्वारा लिखी गयियाँ केश नामी कताबां  दे ना एस प्रकार हन:-

  • जितो,
  • अ दीवान आफ गजल,
  • डुग्गरनामा,
  • एक शहर यादें दा,
  • डोगरी  एकांकी  दा  सफरनामा ,
  • गीत गंगा,
  • ठहरा हुआ कोहरा,
  • दे दो एक बसंत

हिंदी,अंग्रेजी, उर्दू, कश्मीरी, नेपाली ते चैक पाशा च इन्दी कताबां गी तर्जमा किता गया।
इन्हां ही नि इन्हें ने डोगरी नजमें गी वखरी ही पंशान  दिती है।इनदे केश गीत एस प्रकार हन:-

अग्नि गीत

अगली बर्फबारी में
मौसम जब बर्फ हो जाएगा
सारी झील जम कर काँच हो जाएगी
फैल जाएगा कोहरा आस-पास
और तुम देख नहीं पाओगी
अपना आप
तुम्हारे वस्त्र छेद कर
उतर जाएगी दूर तक
तुम्हारे अन्दर
बर्फानी हवाएँ
जमने लगेगा तुम्हारी रगों में
रक्त लाल
और तुम खुद होने को होंगी
एक बर्फ की शिला
तो ऐसे मे मैं प्रिये!
तुम्हें भेजूँगा
काँगड़ी में दबी आग
जिसे
तुम बांटोगी
घर-घर जाकर
आज जिसे एक दिन
ज्वालामुखी होना है
और
किसी शाल , स्वेटर की जगह
भेजूँगा तुम्हें
एक अग्नि गीत
क्रान्ति गीत

जिसे तुम
घर आँगन , छज्जो छत्तों
पर गाओगी
गीत जिसे कल
संतूर , रूबाब नहीं
इंकलाब होना है।

एक गीत का जन्म

मन के खेत में दबी
एक सकारात्मक सोच को
जब मिलते हैं
दर्द के रंग और रोशनी
भावों की उष्मा
हालात की हवा
विरह, पीड़ा की खाद
और
निंरन्तर बहती
अश्रुधारा की नमी
हर दिन
साँय प्रातः
तो फिर कहीं जाकर
कोई कौंपल फूटती है
किसी एक गीत का
जन्म होता है।

डा.जीतेन्द्र उधमपुरी ने अगे आने आली पीड़ी दे लेई एक वखरी ही मसाल कायम किती है और उन सारे लोककें गी चुप कराया है जो  डोगरी पाशा गी एक गरायीं पाशा मन्दे हन ।

Salute to such a Hardworking person.

Proud To be a Dogra

Jai Hind.

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