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Karz Tirange Da….क़र्ज़ तिरंगे दा
1डोगरी पाषा ते देशभक्ति दा इक अनोखा समागम “कर्ज़ तिरंगे दा” १२ अगस्त गी सारे जम्मुवासियें दे सामने डुग्गर प्रदेश युवा संगठन द्वारा प्रस्तुत किता गया हा| इस प्रोग्राम च डोगरी कलाकार,लेखक ते डोगरी दे जन्करें हिस्सा लेयिये चार चार चार चन्न लाये|
It’s DPYS, a social organization incorporated with the mission to promote Dogra language, literature, culture and history along with other social activities, which took the honor to organize an event “Karz Tirange Da” to color Dogra land with patriotism and commemorate the freedom-fighters and their struggle for independence.
Chief guest in this event was Retd. Maj. Gen. GS Jamwal. And the guests present there were Sh. Chandu bhau
Sh. Yashpal Nirmail
Sh. Ram Pal Sharma.
Smt. Ayhodaya Rani
Sh.Sham Talib
Sh. Puran chand Bagotra
Sh. Ramesh Rahi
And Sh. Sh. Brij Mohan..Sh. Gyaneshwar Sharma has presided the function
This is not the first event of it’s kind organized by DPYS. They have organized events like “Naman-Salute to Our Heroes” to pay homage to the martyrs who have laid down their lives to defend the state lately. Started from social networking sites Orkut and Facebook, with the help of volunteers who want to do something for their motherland and revive the sense of pride for the Dogra culture, today it’s an NGO registered with the name “Duggar Pradesh Yuva Sansthan Trust”.
Special Thanks to people for making it possible- Gourav Jamwal,Ritika Pathania,Rakesh Singh Sambyal,Nitin Singh Sambyal,Abhishek Parihar,Rahil Gupta,Surbhi Jamwal,Mallu Jasrotia,Codis Mahajan,Vishal Gupta,Vikas Mahajan and Amir Ali Khan.

National Heritage Tour Expedition,Udhampur,2010
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Youth hostel association of India,J&K have joined their hands with Udhampur Administration,Tourism Dept. and Sports Department to organise a national heritage track expedition from April 29th to july15th ,2010.A very good step towards the promotion of the adventure tourism in J&K.
J&K is one of the best place for such adventure tourism thanks to its varied topography,geographical and climatic conditions.And if properly developed can surely gonna help the socio-economic Conditions of the the citizens of the state.
Such type of expeditions can help jammu to show its Unique heritage sites, green meadows and pastures, lofty mountains with thick deodar forests, clear natural water springs, brooks and the river.
This type of trekking expeditions can really help youngsters in strengthening bonds among each other,gonna learn about different plants and wildlife, and last but not the least,the great experience and infusion of fresh energy.
Alongwith this they can also spread messages of GO GREEN and how to protect these beautiful forests.As we have seen many times,forests are burning every other day in the months of summer especially due to the ignorance of natives.Most fire incidents are deliberate acts. The local villagers also tend to set grasslands afire to get softer grass after the rains. In most cases, the fire from grasslands spreads to nearby forests.
The base camp of trekkers is Udhampur and from here these trekkers are going to drop in Pancheri.From the beautiful Sankri Devta Hills,the trekking is going to start and will cover areas like Nathatop,Sanasar,Patnitop,Sudh Mahadev and Mantali. Last year this national event was attended by a total of 1843 Trekkers but this time it is expected to cross four thousand.
Such type of programmes have to be regularly conducted by Sports department or any other department.And then someday make it an national event or if possible an international event,so that world comes to know that its not only terrorism which exists in our state.Such type of events can really helps in improving the finacial health of the state which is at present in deep shambles. Tourism industry can really boost our state’s economy.We,really appreciate your work and hope to see such programmes in the near future Motivation is what gets you started,Habit is what gets you keep going.
So Keep this good habit:)
Jai Hind
Padmashree Dr. Jitendra Udhampuri-The Great Dogri Poet
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डा.जीतेन्द्र उधमपुरी एक एहा नां जेने उधमपुर दा ही नि पूरे जम्मू सूबे दा ना पूरे देश च मशूर किता है। इन्दा जनम उधमपुर शैह्र च होया और केश मजबूरियें दी वजह कन्ने इन्हें गी बाद इच जम्मू शिफ्ट ओना पेया।
इन्दा नां डा.जीतेन्द्र गुप्ता हा पर उधमपुर शैह्र दे प्यार ने इन्हें गी अपना नां बदलने ऊपर मजबूर करी दिता। इन्दी माँ दा सुखना हा की एह डाक्टर या इंजीनियर बनने दी वजाए अपनी पढाई साहित्य च करन पर इन्दी माँ अपना सुखना पूरा होंदा नी दिखी पाईयां और इन्दा इंतकाल बड़ी तौले ही ओई गया जेस वेल्ले डा.जीतेन्द्र उधमपुरी दी उम्र सिर्फ १५ साल ही। बड़ी मुसीबतां ते मुश्किलां चुकिये इन्हें हिंदी,उर्दू ते अंग्रेजी पाशाएं च ग्रेजुएशन पूरी किती ते फी अपना पी.जी. कौर्स वि इन्ही त्रे पाशा ते Mass Communication च पूरा किता। इन्हां ही नि ऐदे बाद इन्हांने Ph.D. डोगरी ड्रामा च पूरी किती। पर इन्हीं आर्थक लचारी दे वाद वी इन्हें अपनी हिम्मत नि शोड़ी और अपनी पढाई चालू रखी ते कन्ने कन्ने निक्का मुट्टा काम वि करदे गये और आज एक एहा मक़ाम हासिल किता है जी सी दिखी ते सुनिए ही हर डोगरा गर्व महसूस करन लगदा है ।
इन्हें गी ४०-५० साल ओई गये हैं साहित्य च कम करदे होए। इन्हें गी १९८१ च साहित्य अकादमी अनाम थोया हिंदी साहित्य च दिते गये इनदे योगदान दे लेई। इन्हां ही नि इन्हें गी आज तक जम्मू कश्मीर अकादमी आफ आर्ट एंड कल्चर दी तरफां तू चार अनाम, राष्ट्रीय हिंदी सेवा सहस्रवादी अनाम,राष्ट्र कवि पंडित सोहन लाल अनाम, सुभद्रा कुमारी चौहान जन्म शताब्दी अनाम, राष्ट्र कवि पंडित सोहन लाल अनाम कुल मलाइये १५० दे करीब अनाम थोये दे हन।
सबतू वडा अनाम इन्हें गी केश दिन पहले ही राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल दी तरफां पद्मश्री द्वारा दिता गया। एस अवार्ड दी के एहमियत है ओ हर भारतीय जान्दा है,मेरे ख्याल कन्ने उसी इथे बतान दी कोई लोड़ नि होनी चाईदी।
डा. जीतेन्द्र उधमपुरी द्वारा लिखी गयियाँ केश नामी कताबां दे ना एस प्रकार हन:-
- जितो,
- अ दीवान आफ गजल,
- डुग्गरनामा,
- एक शहर यादें दा,
- डोगरी एकांकी दा सफरनामा ,
- गीत गंगा,
- ठहरा हुआ कोहरा,
- दे दो एक बसंत
हिंदी,अंग्रेजी, उर्दू, कश्मीरी, नेपाली ते चैक पाशा च इन्दी कताबां गी तर्जमा किता गया।
इन्हां ही नि इन्हें ने डोगरी नजमें गी वखरी ही पंशान दिती है।इनदे केश गीत एस प्रकार हन:-
अग्नि गीत
अगली बर्फबारी में
मौसम जब बर्फ हो जाएगा
सारी झील जम कर काँच हो जाएगी
फैल जाएगा कोहरा आस-पास
और तुम देख नहीं पाओगी
अपना आप
तुम्हारे वस्त्र छेद कर
उतर जाएगी दूर तक
तुम्हारे अन्दर
बर्फानी हवाएँ
जमने लगेगा तुम्हारी रगों में
रक्त लाल
और तुम खुद होने को होंगी
एक बर्फ की शिला
तो ऐसे मे मैं प्रिये!
तुम्हें भेजूँगा
काँगड़ी में दबी आग
जिसे
तुम बांटोगी
घर-घर जाकर
आज जिसे एक दिन
ज्वालामुखी होना है
और
किसी शाल , स्वेटर की जगह
भेजूँगा तुम्हें
एक अग्नि गीत
क्रान्ति गीत
जिसे तुम
घर आँगन , छज्जो छत्तों
पर गाओगी
गीत जिसे कल
संतूर , रूबाब नहीं
इंकलाब होना है।
एक गीत का जन्म
मन के खेत में दबी
एक सकारात्मक सोच को
जब मिलते हैं
दर्द के रंग और रोशनी
भावों की उष्मा
हालात की हवा
विरह, पीड़ा की खाद
और
निंरन्तर बहती
अश्रुधारा की नमी
हर दिन
साँय प्रातः
तो फिर कहीं जाकर
कोई कौंपल फूटती है
किसी एक गीत का
जन्म होता है।
डा.जीतेन्द्र उधमपुरी ने अगे आने आली पीड़ी दे लेई एक वखरी ही मसाल कायम किती है और उन सारे लोककें गी चुप कराया है जो डोगरी पाशा गी एक गरायीं पाशा मन्दे हन ।
Salute to such a Hardworking person.
Proud To be a Dogra
Jai Hind.
Signing out,
Self Respect,Money,India,Jammu,Me and You
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आजकल भारत में एक बहस छिड़ी हुई है कि महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए या नहीं,कुछ लोग इसके पक्ष मैं बोल रहे हैं और कुछ इसके विरुद्ध भी हैं। ऐसा लग भी रहा है कि महिला आरक्षण कानून पारित होने में अब ज़्यादा समय नहीं लगेगा। जवाहरलाल नेहरू ने एक बार कहा था कि सिर्फ कानून बनाने से कुछ नहीं हो सकता, स्त्री अथवा पुरूष तब तक
आज़ाद नहीं हो सकते जब तक वह एक दूसरे के आर्थिक प्रधानता के तले दबे हुए हैं। भारत में आरक्षण देना एक प्रकार से गन्दी राजनीती का हिस्सा बन गया है और इस गंदगी से ज़्यादातर नेता अपना फायदा उठाना चाहते हैं और हम आम लोग भी कोई कसर नही छोड़ते अपने आपको जाती,धर्म आदि के नाम पर तोलने के सिवाय। हमारी सरकार हर समय भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का हवाल देते हुए अपने उत्तरदायित्व से बचती है पर सच्चाई इसके पूरे विपरीत ही है, गरीब ज़्यादा गरीब हो रहा है और अमीर ज़्यादा अमीर। देश मैं आज लाखों टन अनाज सड़ रहा है और मेहेंगाई दिन प्रतिदिन बदती ही जा रही है रही है और पूछने वाला कोई नही है। भ्रष्टाचार इस समय भारत को धीरे धीरे निगलता जा रहा है और हम इसे कम करने की बजाय व्यवस्था को इसका दोषी मानते हुए,अपने दायित्व से भाग रहे हैं। ऐसी गन्दी प्रणाली की वजह कोई और नहीं हम ही हैं।
यह तो हो गयी भारत की बात और अब हम बात करते हैं इसके एक राज्य जम्मू कश्मीर की बात। इस राज्य का इतिहास,संस्कृति,सुन्दरता अपने आप में अलग ही मिसाल रखते हैं,एक ऐसा राज्य यहाँ पर फिरंगी भी कब्ज़ा नहीं कर पाए। पर अब इस राज्य की ऐसी दुर्दशा हो चुकी है कि इसको शब्दों मैं बयाँ भी नही किया जा सकता। एक तरफ से पाकिस्तान दीमक कि तरह इसे खाए जा रहा है तो दूसरी तरफ से चीन गुपचुप तरीके से कब्ज़ा किये जा रहा है। और भारत को इससे कोई फिकर नही हैं क्यूंकि हमारे भारत मैं तब तक कुछ नहीं होता जब तक पानी सर के उपर से निकल ना जाये।
अब थोड़ी सी बात यहाँ पर होने वाली राजनीती की भी बात करते हैं,कांग्रेस जो की केंद्र मैं रहते हुए नारी सशक्तिकरण का नारा देती है वहीँ दूसरी तरफ राज्य में पीडीपी और नेकां से हाथ मिला कर एक ऐसा घिनोना विधेयक पारित करती है
जिसे कोई सपने में भी नही सोच सकता की क्या वाकई हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं। धर्माधारित क्षेत्रिय भेदभाव तो इस राज्य की नीयति बन चुका है मगर अब लिंगाधारित नागरिक भेदभाव भी मुंह उठा के खड़ा हो चूका है। इस विधेयक के खिलाफ कुछ आवाजें उठने भी लगी हैं,पर वो एक विशेष समुदाय तक ही सिमित रही हैं,फेसबुक पर इस विधेयक के खिलाफ काफी ज़ोर शोर से आवाज़ उठाई जा रही है पर वो इसे एक विहेश समुदाय तक ही सिमित रखे हुए हैं। क्या डोगरा,गोजरी,लदाखी आदि को अपने आतम सम्मान की कोई चिंता नहीं है? क्या हम लोग, खासकर मैं यहाँ डोगरों को ललकारना चाहूँगा क्यूंकि वो इस राज्य का दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है जो इस विधेयक के खिलाफ कुछ भी नही बोल रहा। और यह कितने ही शर्म की बात है आजकल हम लोग पैसे को ज्यादा इज्ज़त देने लग गये हैं चाहे हमारा आतम सम्मान ही क्यूँ ना दाव पर लग जाये। क्या आज पैसा इतनी महतवपूर्ण ज़रिया बन गया है कि इसके अलावा हमने कुछ देखना ही बंद कर दिया है?
कल यही सवाल मैंने किसी से पूछा था की तुम्हारे लिए क्या ज़्यादा महत्व रखता है और उसका जवाब उल्टा मेरी ही तरफ था की, “अभी तुम्हें घर वाले खिला रहे हैं इसलिए तुम्हें पैसे की इज्ज़त नहीं पता”।
जो भी कुछ लोग इसे पड़ रहे हैं मेरा उनसे सिर्फ एक ही प्रशन है कि क्या आज की दुनिया में आतम सम्मान ज़्यादा मायने रखता है या फिर पैसा?,ये सवाल खासकर मैं जम्मुवासियों से पूछना चाहता हूँ ?
साथ ही मैं एक बात सपष्ट कर देना चाहता हूँ की मेरे इस प्रशन का बिल्कुल भी ऐसा मतलब ना निकला जाये की मेरे कहने का मतलब है सिर्फ इज्ज़त कमाओ,पैसा नहीं। मैं तो बस इतना जानना चाहता हूँ कि क्या पैसा कमाने के लिए हम अपने सम्मान को दाव पे लगा दे? हम लोग अक्सर देखते हैं की डोगरा,लद्दाखी अक्सर ऐसा इलज़ाम लगते हैं की कश्मीरी नेता हमारे साथ भेदभाव करते हैं,कभी किसी ने इसकी वजह जानने की कोशिश की?
“नहीं“,क्यूंकि हम सबको पता है इस भेदभाव के लिए ओर कोई नहीं सिर्फ हम खुद ही ज़िम्मेवार हैं।
कुछ लोग अक्सर मेरे पर आरोप लगाते हैं कि मुझे सिर्फ ब्लॉग लिखने आते हैं और जब मुझे हक़ीक़त में यह सब करना पड़ेगा तो ही असलियत का एहसास होगा,क्यूंकि ब्लॉग तो कोई भी लिख सकता है।
अगर ब्लॉग लिखना इतना ही आसान होता तो जम्मू में ब्लॉग लिखने वालों कि इतनी कम संख्या नहीं होती।
मेरा ब्लॉग लिखने का एक ही लक्ष्य है कि मैं अपने जम्मू की दबी हुई आवाज़ को सबके सामने रख सकूँ चाहे सामने वाला मुझे कितनी ही गालियाँ क्यूँ ना दे।
यह मैं करता रहूँगा जब तक मुझे मेरा लक्ष्य नहीं प्राप्त हो जाता है पर मैं तुम जैसे लोगों कि तरह अपने आतम सम्मान से ज़्यादा प्राथमिकता नहीं दूंगा, साथ ही मैं तुम लोगों की तरह system को दोषी मानने के बजाय हम सब को दोषी ठहराऊंगा और अगर मेरी इस सोच से किसी को कोई समस्या है तो मैं कुछ नहीं कर सकता।
मैं अपने भारत देश से बाकि देशों से ज़्यादा प्यार करता हूँ कारणवश मुझे पूरा अधिकार है कि मैं अपने देश (bharat) और अपनी मातृभूमि (जम्मू) की निरंतर आलोचना और प्रशंशा करूँ।
I know I am very rude in my last few statements,but few word of some Jammuities hurt me a lot like money matters more than self-respect,I can do anything for publicity(and the article:-Debut entry in Blog world written by some Abhyudhay,about whom I dont know much is also some fakie person created by me).
अगर अपनी आवाज़ रखना एक Publicity stunt कहलाता है तो हाँ मैं ज़रूर ऐसी publicity करता रहूँगा चाहे तुम्हें कितनी ही तकलीफ क्यूँ न हो।
As Sidhu says,”No one one dares to kick a dead dog.”
Someone has rightly said,“When we judge or criticize another person, it says nothing about that person; it merely says something about our own need to be critical.”
One more,”All of us could take a lesson from the weather. It pays no attention to criticism.”
जार्ज विलिअम्स ने एक बार कहा था,”A man’s country is not a certain area of land, of mountains, rivers, and woods, but it is a principle and patriotism is loyalty to that principle.”
जाते जाते एक छोटी सी कहानी सुनाता चलूँ :-
- एक बार एक मछुआरा नदी किनारे बैठा हुआ मछलियाँ पकड़ रहा था और उसी समय वहां पर एक अमीर आदमी आया और कुछ देर तक उस मछुआरे को कुछ दुरी से ध्यान से देखता रहा। एक घंटे बाद जब मछुआरा अपना कम समाप्त कर जाने लगा तो वह अमीर आदमी उसके पास आया और पूछा की इतनी जल्दी क्यूँ जा रहे हो ?
- मछुआरे ने जवाब दिया की मैंने एक घंटे में इतनी मछलियाँ पकड़ ली हैं की मेरा एक हफ्ता आराम से गुज़र जायेगा और अब मैं घर जा रहा हूँ ताकि में अपने परिवार के साथ कुछ समय व्यतीत कर सकूँ।
- आदमी:-तुम और भी मछलियाँ पकड़ सकते हो अभी पूरा दिन बाकि है जिससे तुम कुछ और कमाई कर सकते हो सकते हो और खुद की एक नाव और खुद के नौकर चाकर भी रख सकते थे और खुद आराम करो।
- मछुआरा :- इससे मुझे क्या हासिल होगा ?
- आदमी:- अच्छा खासा पैसा कमाने के बाद तुम कुछ आदमी काम पर रख सकते हो और यह काम कोई भी चला सकता है तुम्हारी अनुपस्थिति में और साथ ही में तुम पैसा कमाने का कोई ओर ज़रिया भी अपना सकते हो,जिससे तुम्हारे पास कमाने का एक ओर साधन हो जायेगा।
- मछुआरा:- नमस्ते! में चलता हूँ अब। और जो मुझे ज़िन्दगी में चाहिए वो मैं कर ही रहा हूँ।
Moral of the story is:-
Sometimes we get so caught up in producing, achieving and becoming successful, that we may never stop to ask, “What is life all about? What am I really living for?”
मैं आशा करता हूँ की मेरी कुछ बातों से किसी के दिल को ठेस न पहुंचे पर जो मेरे दिल में था तो वो मैंने कुछ अक्षरों मैं लिख दिया।
हिंदी में मैंने काफी सालों बाद कुछ लिखने का प्रयत्न किया है,अगर किसी को कोई गलती नज़र आती है तो उसे कृपया कर मेरे ध्यान में ज़रूर लायें।
धन्यवाद!
Double Face of Congress Exposed Again
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This is not for the first time that Congress proposed this bill,they proposed this bill in March,2004 as well when they were in power with the help of Pro- Pakistan People’s Democratic Party.At that time,this bill was passed in the assembly without any discussion in just 6 minutes.This controversial bill created a hue and cry in whole India,which makes Congress to think once again on this.And that makes Congress to cancel the bill.
He further added that “It is the age of women empowerment. The Women’s Reservation Bill has been passed by the Rajya Sabha and the fairer sex in the state should be empowered more. The ownership of property will make her financially, socially and legally strong to stand for her rights.” However, when a woman journalist asked him how could the government talk of women empowerment when it allowed the tabling of an anti-women Bill, the Finance Minister said the Bill had not been passed. He said,“It is a private member’s Bill and we want to expose the Opposition via debate on the issue“.









