Shweta Tyagi
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पोलिथीन – पर्यावरण के लिए एक अभिशाप
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आज घर लौट ते वक़्त मेरी नज़र एक कूड़े के ढेर के पास खड़ी गाय पर पड़ी वह एक पोलिथीन से कुछ खाने की कोशिश कर रही थी | वह बार – २ पोलिथीन में बंद सामान को निकालने की कोशिश कर रही थी,लेकिन पोलिथीन बंद होने के कारण निकाल नहीं पा रही थी | यह देखते -२ मैं आगे बढ़ गई और सोचने लगी न जाने कितने समय से हम सुनते आ रहे हैं कि पोलिथीन हमारे और हमारे आसपास रहने वाले जीवों के लिए घातक है और कई बार तो सरकार इसके उपयोग पर प्रतिबन्ध भी लगा चुकी है पर कोई भी असुविधा मोल नहीं लेना चाहता | हर एक को सुविधाएं चाहिए फिर चाहे नतीजा कुछ भी हो | विडम्बना तो देखिये हम जितना ही पोलिथीन के घातक परिणामों से अवगत होते जा रहे हैं उतना ही उसका उपयोग बढ़ाते जा रहे है | आजकल हर सामान पोलिथीन में आने लगा है यहाँ तक की गेंहूँ,चावल,आटा,दाल इत्यादि सब पोलिथीन में आते हैं|
आप किसी भी सुपर माल या मार्केट में जाइये वहां आपको सब चीज़ें पहले से ही पोलिथीन में पैक हुई मिलती है जब आप खरीददारी करके काउंटर पर बिल जमा करते हैं,तब वह आपको सारा सामान एक और बड़े पोलिथीन मे पैक कर के दे देता है| आप सब्ज़ी वाले के यहाँ जाइये तो वह तो पोलिथीन के बिना सब्जी ही नहीं देता जैसे पोलिथीन वाले से पैक्ट किया हो | पोलिथीन हमारी जिंदगी मे इस कदर हावी हो गई है कि आज इसके बिना किसी सामान को खरीदने के बारे मे सोच भी नहीं सकते |
आजकल हर सामान पोलिथीन के पकेट्स और पाउच में मिलता है | चिप्स से लेकर आटे तक, दूध से लेकर घी तक, गुटके से शराब तक कोई भी ऐसा सामान नहीं है जो पोलिथीन मे पैक होकर न आता हो | मैंने देखा है कुछ लोग यात्रा करते वक़्त खाने का सामान और पानी की बोतलें खरीदते हैं और यात्रा समाप्त होने पर उन बोतलों को या तो रास्ते मे फेंक देते है या सड़को पर | कोई उनसे पूछे कि क्या वो अपने घर मैं भी ऐसा करते है तो उनका जवाब होगा नहीं हम तो सफाई पसंद है,हमारा घर तो एकदम साफ़ रहता है तो फिर ये सफाई सार्वजनिक स्थलों के लिए क्यूँ नहीं??
आज कोई भी ऐसा शहर या मोहल्ला नहीं है जो पोलिथीन नामक बिमारी से ग्रसित न हो | सड़कें,नालियां सब पोलिथीन से भरे पड़े है | बरसात में कईं मोहल्लों की नालियों का पानी पोलिथीन से अटा होने के कारण रुक जाता है,जिससे कितनी असुविधा होती है इससे हम अनजान नहीं है | हर साल न जाने कितने जानवर पोलिथीन खाने से उत्पन्न हुई बिमारियों के कारण मरते हैं | जहां हमारी सड़कों और गली मुहल्लों की शोभा पेड़ पौधों को बढानी चाहिए थी वही अब उसका स्थान पोलिथीन ने ले लिया है |
पहले भी हम लोग अपना सामान लाने ले जाने के लिए कपडे के थैलों का प्रयोग करते थे फिर आज क्या हो गया है आज कैसी शर्म जो हम कपड़े और जूट के थैलों का प्रयोग ही नहीं करना चाहते | हम इसके स्थान पर कागज़ के थैलों का भी उपयोग कर सकते है |
चाहे सरकार कितने भी पोलिथीन मुक्ति अभियान चलाये चाहे कितनी भी रोक लगाये लेकिन इस पोलिथीन रुपी दानव पर विजय पाना तब तक संभव नहीं है जब तक हम स्वयं ही जागरूक नहीं होंगे | आये दिन हमें सुनने में आता है कि आज इस राज्य की सरकार ने पोलिथीन पर प्रतिबन्ध लगा दिया है लेकिन ये कितनी कारगार होती है ये हम सभी जानते है |
भारत मे किसी से भी कोई उम्मीद रखना बेकार है हम सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं हमें किसी और से कोई मतलब नहीं | हम अब इतने स्वार्थी हो गए हैं की अपने धार्मिक प्रतिको को भी पोलिथीन नामक दैत्य का शिकार बनने दे रहे हैं | क्या हमने कभी सोचा है कि जिस गाय को हम माता मानकर पूजते हैं आज वह पोलिथीन खाने से कितनी भयंकर बिमारियों से ग्रसित है | हाल ही में एक गाय के पेट से ३५ किलो तो दूसरी के पेट से ७० किलो पोलिथीन व प्लास्टिक निकला गया | आज हमारी पवित्र नदियाँ गंगा, यमुना, तवी,देविका आदि पोलिथीन के कारण लुप्त होने के कगार पर है |
अगर आपके मन मे अपनी गौ माता और नदियों के प्रति थोड़ी सी भी श्रधा और आस्था है, तो कृपया करके पोलिथीन का इस्तेमाल करना बंद कर दें | कुछ सबक पोरबंदर और वैरावल के मछुआरों से भी ले, जिन्होंने लुप्त होती शार्क की रक्षा का संकल्प लिया है| ये लोग जाल मे फंसी शार्क को बचाने के लिए अपने महंगे से महंगा जाल भी काट देते है|
आज गौ माता और हमारी विलुप्त होती नदियाँ जिन्होंने वर्षों से हम पर उपकार किये हैं, हमसे अपनी रक्षा की गुहार कर रही है | क्या आज हम इतने स्वार्थी हो जायेंगे की उनकी रक्षा के लिए कुछ नहीं करेंगे | उठो भारतीयों आज दिन आ गया है की हम संकल्प ले की पोलिथीन नामक दैत्य को जड़ से उखड फेंकेंगे |
है निहित सभी का हित इसमें;
हो संतुलित अपना पर्यावरण,
रक्षित हों जीव जंतु नभ थल;
प्रकृति, शैल, पताल, तरण…….
श्वेता त्यागी